दुकान में बैठकर बना रहा था आधार ले रहा था अधिक पैसे, पंजीयन लाइसेंस रद्द

आधारकार्ड बनाने व उसमें संशोधन के एवज में कुनकुरी के फैजल इमरान द्वारा लोगों से अतिरिक्त शुल्क लेने तथा प्राइवेट.

आधारकार्ड बनाने व उसमें संशोधन के एवज में कुनकुरी के फैजल इमरान द्वारा लोगों से अतिरिक्त शुल्क लेने तथा प्राइवेट शॉप में बैठकर आधारकार्ड बनाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने उसका यूजरआईडी एवं लाइसेंस को निरस्त कर दिया है।

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कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने न्यू फैजल मोबाइल्स बस स्टैंड कुनकुरी के संचालक फैजल इमरान को सीएससी के लिए जारी अनुमति को भी समाप्त कर दिया है। भविष्य में इनको किसी भी तरीके का शासकीय परियोजना से संबंधित कार्य नहीं दिया जा सकेगा।

शासन के निर्देशानुसार आधारकार्ड के पंजीयन एवं संशोधन की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप शासन द्वारा तय भवन जैसे तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत कार्यालय, नगरपलिका या नगरपंचायत भवन, ग्राम पंचायत भवन में ही किया जाना है। इसी शर्त के आधार पर किसी भी ऑपरेटर को यूजरआईडी एवं काम करने की अनुमति दी जाती है।

कुनकुरी में फैजल इमरान को भी इसी शर्त के आधार पर अनुमति दी गई थी और उसे कुनकुरी नगरपंचायत कार्यालय में बैठकर काम करना था, परंतु वह कुनकुरी बस स्टैंड स्थिति अपनी निजी मोबाइल शॉप में इस काम को कर रहा था। आधारकार्ड पंजीयन एवं संशोधन की प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क से ज्यादा राशि लेने की शिकायत भी सूचना प्रौद्योगिक विभाग एवं भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने अपनी जांच में सही पाई। एसडीएम कुनकुरी ने भी इस मामले की जांच कर जिला प्रशासन को अपना प्रतिवेदन दिया था।

इसके आधार पर उसे जारी यूजरआईडी एवं आधार पंजीयन का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गई।ई-गर्वनेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के जिला प्रबंधक नीलांकर बासु ने बताया कि किसी भी व्यक्ति का नया आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शासन द्वारा पूर्णतः निशुल्क है। इसके लिए किसी भी व्यक्ति को किसी ऑपरेटर एवं आधार केन्द्र किसी भी तरह की राशि देने की आवश्यकता नहीं है। पूर्व में जारी आधारकार्ड में नाम, पता, मोबाइल नंबर, जन्म तिथि यदि कोई सुधार करवाना हो तो इसके लिए 50 रुपए शुल्क निर्धारित है।

फ्री में बनता है नया आधार कार्ड, सुधार के लिए 50 रु. तय

यूआईडीएआई एवं ई-गर्वनेंस करता है रेंडम जांच

आधार कार्ड पंजीयन एवं पूर्व में जारी आधारकार्ड के संशोधन के बारे में यूआईडीएआई एवं ई-गर्वनेंस नियमित रूप से निगरानी करता है। इसमें किसी भी तरह की अफरा-तफरी की गुंजाइश नहीं है। जितने लोगों को आधार कार्ड बनता है अथवा संशोधित होता है। उसमें से रेंडम रूप से कुछ लोगांे से यूआईडीएआई और ई-गर्वनेंस विभाग के अधिकारी उनके मोबाइल पर बातचीत कर उनसे लिए गए शुल्क एवं अन्य मामलों की जानकारी लगातार लेते रहते हैं। यदि कोई भी आधार केन्द्र का संचालक इसमें गड़बड़ी करता है तो आवेदक चर्चा के दौरान अधिकारियों को खुद ही बता देते हैं।

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