सातवीं आर्थिक जनगणना में 15 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

CSC से आर्थिक जनगणना 2019 ,Enumrator Or Supervisor में क्या है अंतर ? किसमें करना है रजिस्ट्रेशन ।

सबसे पहले जान लेते हैं कि सातवीं आर्थिक सर्वे है क्या ?

सीएससी नई सर्विस, आर्थिक सर्वे 2019

सीएससी नई सर्विस , अप्रैल 2019 में जो आर्थिक सर्वे किया जाना है, उसमें बहुत ज्यादा मैन पावर की जरूरत होगी जिसके लिए सीएससी( कॉमन सर्विस सेंटर ) को चुना गया है । आर्थिक सर्वे 2019 में 12 करोड़ हाउसहोल्ड का आर्थिक सर्वे किया जाना है जिसके लिए सीएससी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जा चुका है ।

केंद्र सरकार सातवीं आर्थिक जनगणना के तहत व्यवसायिक उद्यमों का पंजीकरण करा कारोबारी रजिस्टर बनाने की तैयारी में है। इस कार्य को पूरा करने के दौरान 15 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा। यह गणना वित्त वर्ष 2019-20 में पूरी कर ली जाएगी। केंद्रीय सांख्यिक मंत्रालय के सचिव प्रवीन श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को बताया कि आर्थिक जनगणना के तहत देश के 20 करोड़ घरों और प्रतिष्ठानों से सूचना एकत्र करने में सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) बड़ी भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि हमारा देश में 160 प्राधिकारों का नेटवर्क है, जिससे हम समय पर आंकड़े जुटा लेंगे। योजना के तहत व्यवसायिक उद्यमों को पंजीकृत करने का प्रस्ताव है जिन्हें आने वाले दिनों में लगातार अपडेट किया जाएगा और इसका लाभ केंद्र व राज्य सरकारों समेत विभिन्न हिस्सेदारों को मिलेगा।

हर सीएससी पर 5 तैनाती
योजना के तहत देशभर में प्रत्येक सीएससी पर पांच गणनाकारों की तैनाती की जाएगी जिन्हें सीएससी-एसपीवी की ओर से आर्थिक सर्वे के लिए प्रशिक्षित और पंजीकृत किया जाएगा। पंजीकरण के बाद इनका इस्तेमाल सभी तरह के आंकड़े जुटाने में किया जा सकेगा। देशभर में 3 लाख सीएससी हैं। लिहाजा इस सर्वे के लिए 15 लाख गणनाकारों की जरूरत होगी।

पहली बार पेपरलेस सर्वे

सीएससी-एसपीवी के सीईओ दिनेश त्यागी ने कहा कि यह पहली बार है जब पूरी तरह पेपरलेस आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे सर्वे का काम महज छह माह में पूरा किया जा सकेगा जिसमें अभी तक दो वर्ष का समय लगता है। डाटा जुटाना आसान होने से भविष्य में यह सर्वे हर दो वर्षों पर किया जा सकेगा जो अभी 10 साल में किया जाता है।

प्रति परिवार मिलेंगे 20 रुपये

सर्वे में शामिल गणनाकारों को मेहनताने के रूप में प्रति परिवार 15-20 रुपये दिए जाएंगे। अनुमान है कि सर्वे में देशभर के करीब 20 करोड़ परिवार गणना में शामिल होंगे। इस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हाल में ही सीएससी ने कुछ माह के भीतर ही आयुष्मान भारत के तहत 14 राज्यों में एक करोड़ पंजीकरण किए थे।

सांख्यिकी मंत्रालय के उप महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव ने इस बारे में कहा कि आर्थिक जनगणना सही आंकड़े जुटाकर बदलाव लाने की दिशा में अहम उपलब्धि होगी। सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से हम सभी हिस्सेदारों के साथ समन्वय कर इस काम को अंजाम देंगे।

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