आज पूरा भारतवर्ष मना रहा है अपने कृष्ण-कन्हैया का जन्माष्टमी, जाने लड्डू गोपाल पूजा विधि और शुभ मुहूर्त !

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Date & Shubh Muhurat: सबसे पहले श्री कृष्ण भक्तों को राधे राधे, जी हां आज के इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व कब मनाया जाएगा, हमारे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है |

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Date, हमारे ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म मथुरा में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में और अर्द्धरात्रि को हुआ था | जन्म के कुछ घंटों उपरांत ही भगवान श्री कृष्ण को उनके पिता वासुदेव जी यमुना नदी पार करके गोकुल में नंद बाबा तथा यशोदा मैया के वहां पहुंचाया था | तथा भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा तथा लालन-पालन गोकुल मैं हुआ था |

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Date & Shubh Muhurat
आज पूरा भारतवर्ष मना रहा है अपने कृष्ण-कन्हैया का जन्माष्टमी, जाने लड्डू गोपाल पूजा विधि और शुभ मुहूर्त ! 3

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Date & Shubh Muhurat

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Date:- इस दिन को पूरे भारतवर्ष में महा पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है इसके अलावा श्री कृष्ण के भक्त जहां जहां पर मौजूद हैं जिस जिस देश में मौजूद है वहां वहां पर भी Shri Krishna Janmashtami Festival बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है |

इसके अलावा श्री कृष्ण भगवान से जुड़े हुए बड़े-बड़े संस्था बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमें इस्कान नामक संस्था बड़े पैमाने पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव को धूमधाम से मनाता है | इसके अतिरिक्त गोकुल, मथुरा, वृंदावन, बरसाने में भी जमकर राधे कृष्ण नाम से जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है |

अगर आप अपने जीवन में भगवान श्री कृष्ण और राधा मैया को मानते हैं, तो एक बार वृंदावन तथा मथुरा का दर्शन करने अवश्य जाएं | क्योंकि मुझे यह सौभाग्य दो बार प्राप्त हुआ है अगर एक बार वहां पर जाएंगे तो आप वहीं के होने का मन करेगा क्योंकि वहां हर जगह “राधे कृष्णा-राधे कृष्णा” मय जीवन है |

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 ka Shubh Muhurat

Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Date:- वैसे इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त के दिन ध्रुव और वृद्धि योग का निर्माण कर रहा है, इसलिए 18 अगस्त की रात में 8:00 बजकर 40 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा | उसके उपरांत ध्रुव योग शुरू हो जाएगा | जो 19 अगस्त को रात्रि 8:00 बजे से 59 मिनट तक रहने वाला है | हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक यह योग बेहद खास माना गया है | इस युग में किए गए कार्य का परिणाम अति शुभ माना जाता है |

श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का शुभ मुहूर्त जाने {Krishna Janmashtami 2022 Shubh Muhurat}

प्रख्यात पंडित या ज्योतिषाचार्य की माने तो इस बार Shri Krishna Janmashtami Festival 18 अगस्त को पूरे भारतवर्ष में मनाई जाएगी | अष्टमी तिथि 18 अगस्त को शाम 9:00 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी और अगले दिन 19 अगस्त को रात 10:00 से 59 मिनट पर समाप्त होने वाली है | निशीथ पूजा 18 अगस्त की रात 12:00 बजे से 3 मिनट से लेकर 12:00 बज के 45 मिनट तक ही रहेगी | वही निशीथ पूजा की कुल अवधि 44 मिनट की है | पारण 19 अगस्त को सुबह 5:00 से 52 मिनट तक ही रहेगा |

वही मीडिया तथा और अन्य ज्योतिष आचार्यों की माने तो इस बार की जन्माष्टमी तिथि को लेकर काफी मतभेद दिख रहे हैं | कई जगहों पर श्री कृष्ण भगवान के भक्त 18 अगस्त को तो कहीं 19 अगस्त को Shri Krishna Janmashtami Festival मनाए जाने का दावा कर रहे हैं |

 Shri Krishna Janmashtami Festival
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अधिकतर विद्वानों का यही मत है कि 18 अगस्त की रात्रि 12:00 बजे जन्माष्टमी तिथि का बेहतर शुभ योग बन रहा है | वहीं कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि 19 अगस्त को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी | वहीं अगर आप ही से धार्मिक दृष्टि से तो Shri Krishna Janmashtami Festival का जन्म रात्रि 12:00 बजे हुआ था इसलिए 18 अगस्त को यह त्यौहार मनाया जाएगा |

ऐसे करें श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजा अर्चना (Shri Krishna Janmashtami Festival 2022 Pujan Vidhi)

पूरे भारतवर्ष में Shri Krishna Janmashtami Festival के दिन भक्त पूरे दिन का उपवास रखते हैं, भगवान श्री कृष्ण के जन्म उपरांत भक्त उत्सव के साथ जश्न मनाते हैं | तत्पश्चात भक्त अपना व्रत तोड़ते हैं तथा मध्यरात्रि के बाद पूजा अर्चना शुरू होती है | इसी दौरान भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है, तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण को नए वस्त्र धारण कराए जाते हैं |

उसके बाद से किस भगवान की प्रतिमा को पालने में बैठाकर झूला झूला जाता है और भक्ति गीत जाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती, इसके अलावा प्रसाद में भगवान श्रीकृष्ण को धनिया की चूर्ण बनाकर तथा फल, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ प्रसाद के रूप में चाहे जाते हैं उसके बाद भगवान श्री कृष्ण को भोग का प्रसाद ग्रहण कर प्रति अपना व्रत तो लेते हैं |

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श्री कृष्ण भगवान के सभी नाम जाने

नीचे श्री कृष्ण भगवान के सभी 108 नाम दिए गए हैं आप देख सकते हैं :-

1. कृष्ण
2. कमलनाथ
3. वासुदेव
4. सनातन
5. वसुदेवात्मज
6. पुण्य
7. लीलामानुष विग्रह
8. श्रीवत्स कौस्तुभधराय
9. यशोदावत्सल
10. हरि
11. चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
12. सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
13. देवाकीनन्दन
14. श्रीशाय
15. नन्दगोप प्रियात्मज
16. यमुनावेगा संहार
17. बलभद्र प्रियनुज
18. पूतना जीवित हर
19. शकटासुर भञ्जन
20. नन्दव्रज जनानन्दिन
21. सच्चिदानन्दविग्रह
22. नवनीत विलिप्ताङ्ग
23. नवनीतनटन
24. मुचुकुन्द प्रसादक
25. षोडशस्त्री सहस्रेश
26. त्रिभङ्गी
27. मधुराकृत
28. शुकवागमृताब्दीन्दवे
29. गोविन्द
30. योगीपति
31. वत्सवाटि चराय
32. अनन्त
33. धेनुकासुरभञ्जनाय
34. तृणी-कृत-तृणावर्ताय
35. यमलार्जुन भञ्जन
36. उत्तलोत्तालभेत्रे
37. तमाल श्यामल कृता
38. गोप गोपीश्वर
39. योगी
40. कोटिसूर्य समप्रभा
41. इलापति
42. परंज्योतिष
43. यादवेंद्र
44. यदूद्वहाय
45. वनमालिने
46. पीतवससे
47. पारिजातापहारकाय
48. गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
49. गोपाल
50. सर्वपालकाय
51. अजाय
52. निरञ्जन
53. कामजनक
54. कञ्जलोचनाय
55. मधुघ्ने
56. मथुरानाथ
57. द्वारकानायक
58. बलि
59. बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
60. तुलसीदाम भूषनाय
61. स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
62. नरनारयणात्मकाय
63. कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
64. मायिने
65. परमपुरुष
66. मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
67. संसारवैरी
68. कंसारिर
69. मुरारी
70. नाराकान्तक
71. अनादि ब्रह्मचारिक
72. कृष्णाव्यसन कर्शक
73. शिशुपालशिरश्छेत्त
74. दुर्यॊधनकुलान्तकृत
75. विदुराक्रूर वरद
76. विश्वरूपप्रदर्शक
77. सत्यवाचॆ
78. सत्य सङ्कल्प
79. सत्यभामारता
80. जयी
81. सुभद्रा पूर्वज
82. विष्णु
83. भीष्ममुक्ति प्रदायक
84. जगद्गुरू
85. जगन्नाथ
86. वॆणुनाद विशारद
87. वृषभासुर विध्वंसि
88. बाणासुर करान्तकृत
89. युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
90. बर्हिबर्हावतंसक
91. पार्थसारथी
92. अव्यक्त
93. गीतामृत महोदधी
94. कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
95. दामॊदर
96. यज्ञभोक्त
97. दानवॆन्द्र विनाशक
98. नारायण
99. परब्रह्म
100. पन्नगाशन वाहन
101. जलक्रीडा समासक्त गॊपीवस्त्रापहाराक
102. पुण्य श्लॊक
103. तीर्थकरा
104. वॆदवॆद्या
105. दयानिधि
106. सर्वभूतात्मका
107. सर्वग्रहरुपी
108. परात्पराय

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